Chhuri Ki Nauk Se Jakhmo Par Wo Marhum Lagate Hai
छुरी की नोक से ज़ख्मों पर वो मरहम लगाते हैं,
ज़ख़्म भी खुद देतें हैं खुद ही आँसु बहाते हैं,
ज़ख़्म भी खुद देतें हैं खुद ही आँसु बहाते हैं,
ये कैसा प्यार है उनका कोई तो हमको समझाओ...
सितमगर हैं या दिलबर हैं वो जो याद आते हैं ।
Chhuri Ki Nauk Se Jakhmo Par Wo Marhum Lagate Hai
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2:22 PM
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